पीडीएस(PDS) – पबलिक डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम

PDS SYSTEM

PDS भारत में मध्यम वर्गीय और गरीब पिछड़ा वर्ग के लोगों की आर्थिक सहायता के लिए भारतीय सरकार द्वारा राशन की दुकानों के माध्यम से आवश्यक वस्तुएं जैसे- गेहूं, चावल, दाल इत्यादि उचित दाम पर मुहैया कराया जाता है|

लेकिन राशन की दुकानों पर अधिकांश जगह पर कालाबाजारी और मुनाफाखोरी होना आम बात है क्योंकि इन लोगों की करतूत का किसी को पता नहीं चलता है और यह लोग गरीब और पिछड़े लोगों का अनाज किसी अन्य व्यक्तियों को ज्यादा पैसे में बेंच कर खुद मोटा मुनाफा कमा लेते थे| बदलते समय के साथ भारत में टैकनोलजी का प्रचार प्रसार हुआ और राशन की दुकानों पर भी मनमर्जी करने वालों पर लगाम लगाते हुए सरकार की ओर से पीडीएस(PDS) के जरिये ऑनलाइन राशन वितरण प्रक्रिया चालू कर दी है|

तो आइए जानते हैं इसके बारे में –

पीडीएस(PDS) क्या है?

पीडीएस(PDS) की फुल फॉर्म पबलिक डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम हैं| इसका अर्थ होता है “सार्वजनिक विवरण प्रणाली” | इस प्रणाली के अंतर्गत वही लोग राशन का लाभ उठा सकते हैं जो सरकारी रिकॉर्ड में गरीब और मध्यमवर्गीय की श्रेणी में आते हैं और राशन के हकदार है| इससे राशन की दुकानों पर हो रही कालाबाजारी और मुनाफाखोरी पर लगाम भी लगती है और पीडीएस(PDS) के जरिए ऑनलाइन राशन का लाभ उठाने वाला लाभार्थी खुद अपना राशन प्राप्त करता है इससे लाभार्थी के हिस्से का राशन स्वयं लाभार्थी को ही मिलता है|

पीडीएस(PDS) के लाभ और बाध्यता

भारत में गांव और शहरी कस्बो में गरीब लोगों को गेहूं, चावल और दाल जैसे महत्वपूर्ण खाद्यान्न रासन कार्ड के जरिए मुहैया कराए जा रहे हैं| इस प्रक्रिया को सरल बनाने के लिए सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत हर लाभार्थी को आवश्यक वस्तुएं वितरण की जाती है|

पबलिक डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम के तहत जहां सरकार लाभार्थी को उनके हक का पूरा राशन सही मूल्य पर देने के लिए बायोमेट्रिक मशीन का उपयोग कर रहे हैं| इससे खुद लाभार्थी अपने फिंगरप्रिंट दबाने के बाद अपने हक का राशन प्राप्त कर सकता है| इससे राशन की दुकानें चलाने वाले मालिक के मुंह बंद हो चुके हैं|

वहीं दूसरी तरफ बायोमेट्रिक मशीन की वजह से गरीबों को काफी परेशानियां हो रही है क्योंकि बायोमेट्रिक मशीन पर फिंगरप्रिंट का अप्प्रूव होना अत्यंत आवश्यक है जिससे काफी बुजुर्ग व्यक्तियों को इस समस्या से गुजरना पड़ता है, क्योंकि फिंगरप्रिंट नहीं आने के बाद मोबाइल पर ओटीपी(OTP) भेज दिया जाता है लेकिन बुजुर्ग व्यक्ति को मोबाइल का उपयोग करना नहीं आता है| बायोमेट्रिक मशीन से राशन प्राप्त करने के लिए लाभार्थी का आम आदमी की पहचान (आधार कार्ड) होना जरूरी है|

पीडीएस(PDS) के आलोचनात्मक कारण

कुछ सर्वे के आधार पर इस बात को उजागर किया गया है कि ग्रामीण क्षेत्रों की बजाए शहरी क्षेत्रों में PDS का संपूर्ण लाभ मिलता है| जबकि ग्रामीण क्षेत्रों तक अभी भी पीडीएस(PDS) की पहुंच कम है| पीडीएस (PDS) का संपूर्ण लाभ नहीं मिलने के कारण ग्रामीण क्षेत्र के गरीबों को खुले बाजार पर निर्भर रहना पड़ता है जो उनके लिए यह काफी ज्यादा महंगा साबित होता है| एक तरफ सरकार द्वारा हर एक कस्बे और गांव तक इस प्रणाली को पहुंचाने का कार्य किया जा रहा है वहीं दूसरी तरफ खुद सरकार को भी खाद्य वस्तुओं पर सब्सिडी के कारण राजकोष पर भारी दबाव मिल रहा है|

सरकार द्वारा राशन की दुकानों पर खाद्यान्न की बड़ी खरीद करने के बाद खुले बाजार पर इन खाद्यान्नों की उपलब्धता कम हो जाती हैं ऐसे वस्त ओं की कीमतों में भी उछाल आ जाता है|

इसलिए भारत सरकार की तरफ से पीडीएस यानी सार्वजनिक विवरण प्रणाली को समाप्त करने की इच्छा जाहिर की है| वर्तमान में हरियाणा और पुडुचेरी में पीडीएस को खत्म कर दिया गया है और डीटीबी के माध्यम से सीधे लाभार्थी तक लाभ पहुंचाया जा रहा है और इस प्रक्रिया को सरकार पूरे देश में लागू करना चाहती है|

पीडीएस के उद्देश्य और विस्तार

भारत में पीडीएस का मुख्य उद्देश्य उपभोक्ताओं को कम और रियायती दरों पर ही आवश्यक उपभोग की सामग्री प्रदान करना है जिससे गरीब पिछड़े लोगों को आवश्यक वस्तुओं की बढ़ती हुई कीमतों के बोझ से बचाया जा सके और न्यूनतम पोषण की स्थिति को भी बरकरार रखा जा सके|

इस प्रणाली को चलाने के लिए सरकार की एक विशेष कमेटी बड़े व्यापारियों और खाद्य उत्पादकों के साथ बाजार का एक बिक्री योग खरीद लेती है इसे ग्राहकों को विवरण करने के लिए उचित राशन दुकानों के माध्यम से उपभोक्ताओं को विवरण के लिए भेज देती है|

भारत में राशन की दुकानों पर मुख्यत – गेहूं, चावल और दालै सबसे ज्यादा वितरण की जाती है| भारत में लाभार्थी को उसके एड्रेस और नागरिकता के आधार पर राशन कार्ड वितरण की जाते हैं| भारत में राशन की दुकानों पर आवश्यक और खाद्य सामग्री केंद्रीय खाद्य निगम (FCl) के द्वारा वितरण की जाती है और इस निगम की स्थापना सन 1965 में हुई थी जो वर्तमान तक बरकरार है| लेकिन पहले यह प्रक्रिया ऑफलाइन थी| जिसे अब लाभार्थियों को सही और सीधे लाभ पहुंचाने के माध्यम से पीडीएस(PDS)के जरिए ऑनलाइन कर दी गई है|

हर पिछड़े हुए व्यक्ति और वर्ग की आर्थिक सहायता के लिए केंद्रीय खाद्य निगम की तरफ से पूरे भारत में राशन की दुकानों और राशन कार्ड के माध्यम से राशन और आवश्यक खाद्य सामग्री मुहैया कराई जाती है, वहीं दूसरी तरफ किसानों को कुछ गुणवत्ता वाले फसलों की उगाई के लिए कम दाम में वितरण किए जाते हैं जिससे किसान आसानी से अच्छी गुणवत्ता वाले बीजों को उगा सके|